ट्रायल से पहले बीमार थे दीपक पूनिया, बदली वेट कैटेगरी और रच दिया इतिहास

0

नई दिल्ली : भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 97 किलोग्राम कुश्ती स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पदक के लिए हुए मुकाबले में उन्होंने मंगोलिया के गनखुयाग गनबातार को 2-1 से हराया। इस जीत के साथ दीपक ने 97 किलोग्राम वर्ग में भारत के 66 साल के पदक सूखे को समाप्त किया। खास बात यह है कि दीपक सामान्य तौर पर इस भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा नहीं करते और आगे भी इसी श्रेणी में खेलने की उनकी योजना नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दरअसल, एशियन गेम्स के ट्रायल से पहले वह बीमार पड़ गए थे, जिसके कारण उनका वजन 5-6 किलोग्राम बढ़ गया। इसी वजह से वह अपने नियमित 86 किलोग्राम वर्ग के बजाय 97 किलोग्राम वर्ग में उतरे और इसी श्रेणी से क्वालिफाई करके कांस्य पदक अपने नाम किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीपक ने बताया, ‘मैं ट्रायल के टाइम पर 97 किलोग्राम की कोई तैयारी नहीं कर रहा था। परिस्थिति कुछ ऐसी आ गई कि मुझे 97 किलोग्राम में ट्रायल देना पड़ा। मेरे लिए अपने वजन से 11 किलोग्राम ऊपर टूर्नामेंट में खेलना और उसमें मेडल जीतना काफी कठिन था। हमारे जो हैवीवेट के पहलवान हैं उनकी कोई खास उपलब्धि नहीं रहती। ये बहुत ही ज्यादा कठिन था। बस एक ही सोच थी कि मुझे मतलब गोल्ड के लिए खेलना है।’

दीपक पूनिया ने 97 किलोग्राम वर्ग में क्यों दिया ट्रायल?

दीपक से सवाल हुआ कि 86 से 97 किलोग्राम में प्रतिस्पर्धा करने के लिए डाइट में क्या बदलाव करना पड़ता है? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ’97 किलोग्राम तो मेरा अभी भी वजन नहीं है। मेरे को फीवर हो गया था। ट्रायल से तीन दिन पहले मेरे को 104 फीवर था। रविवार को ट्रायल होनी थी और बुधवार को मेरे को 104 फीवर था। मेरे को शनिवार को थोड़ा सा मुझे आराम मिला तो मैं ट्रेनिंग करने के लिए जा रहा था तो वो ट्रेनिंग हुई नहीं। मेरा वजन 91 के आसपास में था। अब सिचुएशन बस एक ही थी… या तो मैं ऊपर ट्रायल दे दूं। नीचे तो मैं मतलब वेट कट नहीं कर सकता था, क्योंकि मेरे को बहुत ज्यादा फीवर था और बहुत ज्यादा वीकनेस लग रही थी। तो मुझे मैं डॉक्टर के पास गया और मैं अपनी मतलब ग्लूकोज वगैरह भी बॉडी में चढ़वाई कि मेरे को वीकनेस ना लगे। इसलिए मैंने 97 किलोग्राम में ये ट्रायल दिया था और कोई ऑप्शन नहीं था इसके अलावा।’

दीपक पूनिया का लक्ष्य था स्वर्ण पदक जीतना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीपक ने कहा, ‘ट्रायल जीतने के बाद मैं मान गया था कि मेरे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और बस मेरे को इस वेट में खाली नहीं जाने देना है। मेरे को बिल्कुल गोल्ड के लिए खेलना है। ये मैंने अपना गोल सेट किया था। हालांकि, वो हो नहीं पाया। मेरी जो ट्रेनिंग थी जो मेरी सोच थी वो बिल्कुल यही थी कि मैं बिल्कुल गोल्ड के लिए मैच खेलूंगा। यही मेरा लक्ष्य था और इसी को लेकर मैंने ट्रेनिंग की थी। बस ये था कि मेरे को एक नया उदाहरण सेट करना है कि हैवीवेट में भी मैं देश के लिए बड़े मेडल दूं। ताकि आने वाले बच्चों को वो प्रेरणा मिले मेरे से कि हम बड़े वेट में भी अच्छा कर सकते हैं।’

एशियाड में भार वर्ग बदला, आगे 86 किलोग्राम में ही खेलेंगे दीपक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीपक पूनिया से जब पूछा गया कि क्या वह प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) में 97 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते नजर आएंगे, तो उन्होंने साफ कहा, “मैं 86 में ही खेलूंगा।” दीपक इससे पहले 92 किलोग्राम भार वर्ग में भी मुकाबले कर चुके हैं, लेकिन उनका नियमित भार वर्ग 86 किलोग्राम ही रहा है। इस वर्ग में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक और 2019 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीते थे। वहीं, 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके अलावा, 92 किलोग्राम भार वर्ग में दीपक ने 2025 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here