नई दिल्ली : भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने 2 अक्टूबर को एशियन गेम्स में टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाकर देश का 44 साल का इंतजार खत्म किया। इस बड़ी उपलब्धि के आठ दिन बाद, जब वह झारखंड के सिमडेगा जिले में स्थित अपने गांव के लिए रवाना हुईं, तो उन्होंने कई लोगों को संदेश भेजकर बता दिया कि वह मोबाइल फोन पर उपलब्ध नहीं रहेंगी। इसकी वजह उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या थी, जिसके कारण उनसे फोन पर संपर्क करना संभव नहीं हो पाता।
सलीमा टेटे को अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण अक्सर इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। झारखंड के सिमडेगा जिले के बड़की छप्पर गांव में नेटवर्क की सुविधा नहीं है। उनके पिता मोबाइल टावर लगाने के लिए अपनी जमीन देने की पेशकश भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिथरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव की निवासी सलीमा ने बताया कि मोबाइल कनेक्टिविटी न होने के कारण घर पर रहने के दौरान अधिकारियों, खेल संगठनों और अन्य लोगों के संपर्क में बने रहना मुश्किल हो जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे अक्सर लोगों को पहले ही बताना पड़ता है कि मेरा फोन नेटवर्क से बाहर रहेगा।”
सलीमा टेटे के गांव में पीने के पानी की सुविधा भी नहीं
टेटे ने सोमवार (12 अक्टूबर) को सिमडेगा की डिप्टी कमिश्नर कंचन सिंह को एक पत्र सौंपकर गांव में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी और पीने के पानी की सुविधा की मांग की। उन्होंने अफसोस जताया कि गांव का नाम रोशन करने के बावजूद वहां अभी भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेटे ने कहा, ‘इतने अहम पद पर होने के बावजूद मुझे लोगों से कहना पड़ता है कि इमरजेंसी की स्थिति में वे दूसरे लोगों से संपर्क करें।’
नेटवर्क नहीं होने से सलीमा टेटे के छूट जाते हैं जरूरी ईमेल और मैसेज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेटे ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत दुखद और भावुक करने वाला मामला है। आप इतने बड़े मंच पर खेलते हैं, भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और आपके गांव में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं है। मुझे निश्चित रूप से इसका दुख है।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेटे ने कहा कि इस समस्या के कारण उनसे अक्सर जरूरी ईमेल और मैसेज छूट जाते हैं।
मुखिया ने माना, गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिथरा ग्राम पंचायत के मुखिया अनिल उरांव ने माना कि सुविधाओं की कमी एक चिंता का विषय है। उरांव ने बताया,’टेटे उस गांव की रहने वाली हैं, जो मेरी पंचायत के अंतर्गत आता है। वह हमारे गांव, ब्लॉक, जिले, झारखंड राज्य और पूरे देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन यह दुख की बात है कि उनके अपने गांव में सुविधाओं की कमी है। यहां नेटवर्क की बहुत बड़ी समस्या है।’
सलीमा टेटे के पिता की पहल भी बेअसर, मोबाइल टावर लगाने का इंतजार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओरांव ने बताया कि उनकी पंचायत में एक मोबाइल टावर लगा है, लेकिन उसका कवरेज ‘बड़की छप्पर’ तक नहीं पहुंचता, जिससे वहां के लोग न तो फोन कॉल कर पाते हैं और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओरांव ने कहा, ‘यह टावर गांव के कवरेज एरिया से बाहर है। टेटे के पिता सुलक्ष्ण ने मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन देने की पेशकश भी की थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।’
आदिवासी बहुल गांव में सुविधाओं का अभाव, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओरांव ने इलाके में सड़क की खराब हालत की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से इलाके के और बच्चों को खेल में हिस्सा लेने के लिए बढ़ावा मिलेगा। आदिवासी समुदाय के लिए काम करने वालीं ऑगस्टिना सोरेंग ने टेटे के गांव का दौरा किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘ कप्तान बनने (2024 में) के बाद से टेटे लगातार प्रशासन के सामने यह मुद्दा उठा रही हैं। अगर हम उन्हें रात में कोई मैसेज भेजते हैं तो वह उसे अगली सुबह ही देख पाती हैं (ऐसे इलाके में जाने के बाद जहां थोड़ा सिग्नल मिलता है)।’ सोरेंग ने इसे आदिवासी समुदाय के साथ भेदभाव का मामला बताया।
एशियन गेम्स में भारत की बेटियों ने दोहराया गोल्ड मेडल का इतिहास
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेटे को 2024 में भारतीय महिला हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया। जुलाई में हॉकी इंडिया ने उन्हें जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए कप्तान बनाए रखा, जहां भारत ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया। इस जीत से भारत को महिला हॉकी में अपना दूसरा एशियाई खेलों का गोल्ड मेडल मिला, जो 1982 के बाद पहली बार था। इस जीत से टीम को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन भी मिल गया।
सलीमा टेटे के गांव की परेशानी से खेल विभाग अनजान?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिमडेगा जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि उन्हें इस खास शिकायत के बारे में जानकारी नहीं है। कुमार ने बताया, ‘सिमडेगा एक पहाड़ी इलाका है और कई जगहों पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या है। जिले में नेटवर्क से जुड़ी समस्याओं (जिनमें बीएसएनएस से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं) को देखने के लिए डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमिटी बनी हुई है। हमें यह देखना होगा कि क्या उनके गांव के पास कोई टावर है और इस समस्या के लिए क्या किया जा सकता है।’
हर खिलाड़ी को मिलें बेहतरीन सुविधाएं, यही लक्ष्य
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनोज कुमार ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों तक यह बात पहुंचाएंगे। उन्होंने ‘हम अपने खिलाड़ियों के लिए सबसे अच्छी सुविधाएं चाहते हैं।’ मोबाइल कनेक्टिविटी के बारे में डिप्टी कमिश्नर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन ने पहले भी कई बार केंद्र सरकार के साथ यह मुद्दा उठाया है, क्योंकि बीएसएनएल सेवाएं केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘यह गांव मोबाइल नेटवर्क कवरेज एरिया से थोड़ा बाहर है… हमने एक बैठक के दौरान इलाके के सांसद के सामने भी यह मुद्दा उठाया है।’
गांव की बदहाली पर खूंटी सांसद का पक्ष नहीं मिल सका
खूंटी के सांसद काली चरण मुंडा से संपर्क नहीं हो सका। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीने के पानी के मुद्दे पर सिंह ने कहा, ‘हमने इस मामले पर विचार किया है और जरूरी सरकारी प्रक्रिया शुरू कर दी है।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिमडेगा के विधायक भूषण बारा ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे के बारे में जानकारी नहीं थी। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘लेकिन अब जब मुझे जानकारी मिल गई है तो मैं व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखूंगा।’


