नई दिल्ली : एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को भारतीय एथलीट बरानिका इलांगोवन ने महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। 24 वर्षीय बरानिका ने 4.20 मीटर की ऊंचाई पार कर पोडियम पर जगह बनाई। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा और उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तमिलनाडु के मयिलादुथुरै जिले के कुथलम गांव से आने वाली बरानिका ने जब पोल वॉल्ट में करियर बनाने की शुरुआत की, तब गांव के कुछ लोगों ने उनके फैसले पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने उनके माता-पिता से यहां तक कहा कि यह खेल जोखिम भरा है और अगर बेटी को चोट लग गई तो उससे शादी करने के लिए कोई तैयार नहीं होगा। इसके बावजूद बरानिका के माता-पिता और कोच ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें अपना सफर जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
2019 में लगी थी बरानिका को गंभीर चोट
बरानिका को 2019 में पोल वॉल्ट के दौरान एसीएल की चोट लगी थी और उनकी सर्जरी भी हुई। इसके बावजूद उन्होंने खेल को छोड़ने के बजाय वापसी का फैसला किया। उनके माता-पिता और कोच ने इस दौरान उनका साथ दिया और उनकी क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कांस्य पदक जीतने के बाद बरानिका ने कहा, ‘मैं एक गांव से आती हूं। जब मैंने शुरुआत की, तो 2019 में वॉल्टिंग के दौरान चोट लगने के बाद मेरी एसीएल सर्जरी हुई थी। उस समय हर कोई मेरे माता-पिता से कह रहा था, लड़की को पोल वॉल्ट में हिस्सा क्यों लेने दे रहे हो? यह इवेंट काफी जोखिम भरा है। अगर उसे कुछ हो गया, तो कोई उससे शादी नहीं करेगा।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की बातों के बावजूद उनके माता-पिता ने उन पर भरोसा किया। बरानिका ने अपने कोच को भी अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘वे हमारी पीठ पीछे बातें कर रहे थे, मगर मेरे मम्मी-पापा को मुझ पर भरोसा था। उन्होंने कोच से साफ-साफ बात की। मेरे कोच को मेरी काबिलियत पर भरोसा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने उनसे कहा, ‘वह आपकी सोच से कहीं ज्यादा कर दिखाएगी। वह निश्चित रूप से खेल में नाम कमाएगी।’ मैं उनका भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने दूसरों की बात नहीं सुनी। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया।’
कांस्य पदक जीतने पर बरानिका को नहीं हुआ यकीन
बरानिका के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें शुरुआत में पता ही नहीं चला कि उनका प्रदर्शन उन्हें पोडियम तक पहुंचा चुका है। कजाखस्तान की एक एथलीट के साथ तीसरा स्थान साझा करने के बाद उन्हें साथी खिलाड़ी से पता चला कि उन्होंने कांस्य पदक जीत लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मैंने पदक जीत लिया है। मेरी साथी एथलीट मेरे पास आई और कहा, ‘तुम कांस्य की हकदार हो, तुमने इसे जीत लिया है।’ मेरे साथी ने मुझे बताया कि मैं कांस्य के लिए तीसरे स्थान पर रही। मुझे इसके बारे में तभी पता चला। मैं पर्सनल बेस्ट का लक्ष्य बना रही थी, लेकिन असल में मुझे पदक मिला।’
बरानिका ने एएफआई के समर्थन को दिया श्रेय
बरानिका ने अपनी सफलता का श्रेय एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के समर्थन को भी दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसारउन्होंने बताया कि एशियन गेम्स से पहले जापान में आयोजित तैयारी शिविर ने उन्हें वहां के माहौल के अनुकूल ढलने में काफी मदद की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बरानिका ने कहा कि इस बार एएफआई ने उनके पोल को जापान तक पहुंचाने के लिए एयरलाइंस के साथ लगातार प्रयास किए और आखिरकार इसे संभव बनाया। उन्होंने इसके लिए एएफआई का आभार जताते हुए कहा कि फेडरेशन के सहयोग से उन्हें तैयारी में मदद मिली और वह एशियन गेम्स में पदक जीत सकीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बरानिका के मुताबिक, एशियन गेम्स से करीब एक सप्ताह पहले सुगुपा यूनिवर्सिटी में आयोजित तैयारी शिविर उनके लिए काफी उपयोगी रहा। इस कैंप के दौरान उन्हें जापान के मौसम, समय, खान-पान और रिकवरी के हिसाब से खुद को ढालने का मौका मिला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि आयोजन से जुड़े लोगों ने खिलाड़ियों के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की थीं, जिससे उन्हें प्रतियोगिता से पहले तैयारी करने और जापान के माहौल के अनुकूल होने में काफी मदद मिली।


