नई दिल्ली : टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। टीम जिम्बाब्वे और श्रीलंका से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। पिछले 17 साल में यह पहली बार है कि ऑस्ट्रेलिया टी20 विश्व कप में ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के बाद ऑस्ट्रेलिया ने बेहतरीन खेल दिखाया था और इसी प्रदर्शन के आधार पर उसे 2026 में खिताब जीतने के मजबूत दावेदारों में शामिल किया गया था। लेकिन अक्टूबर-नवंबर में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने खेल की दिशा बदल दी और ऑस्ट्रेलियाई टीम की संभावनाएं प्रभावित हुईं।
भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 5 मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 से हराया, जबकि दो मैच बारिश के कारण धुल गए। इस सीरीज के बाद से ऑस्ट्रेलिया की टीम कमजोर पड़ गई और टी20 वर्ल्ड कप में वह अपनी पूरी ताकत दिखा पाने में नाकाम रही। भारत-श्रीलंका की मेजबानी वाले टी20 वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तान ने अपनी घरेलू जमीन पर ऑस्ट्रेलिया को क्लीन स्वीप कर दिया था। टूर्नामेंट की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया ने आयरलैंड के खिलाफ शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और इसके बाद श्रीलंका ने भी उसे मात दी।
ऑस्ट्रेलिया की टीम का प्रदर्शन गिरावट की ओर
2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद ऑस्ट्रेलिया ने 19 मैच में 16 जीत दर्ज की। 2 में हार का सामना करना पड़ा। एक मैच बेनतीजा रहा। कंगारू टीम की सफलता दर लगभग 89 प्रतिशत थी। भारत से सीरीज हारने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने 11 मैच में 2 जीते और 7 में हार का सामना करना पड़ा। 2 मैच बेनतीज रहा। अब उसकी सफलता दर 22.22 प्रतिशत है।
ऑस्ट्रेलिया को महसूस हुई कमिंस-हेजलवुड की कमी
ऑस्ट्रेलिया के टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खराब प्रदर्शन के पीछे कई कारण हैं, जिनमें पैट कमिंस और जोश हेजलवुड का खेल से बाहर रहना भी शामिल है। इसके अलावा जोश इंग्लिस, कैमरन ग्रीन, ट्रेविस हेड और ग्लेन मैक्सवेल जैसे प्रमुख खिलाड़ी भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। कप्तान मिचेल मार्श की चोट भी टीम के लिए परेशानी बन गई, जिसके कारण वह पहले दो मैचों में अनफिट होकर खेल नहीं सके।


