नई दिल्ली : महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में एशियन गेम्स 2026 की रजत पदक विजेता ईशा सिंह ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मंच पर दबाव के बीच सटीक निशाना कैसे साधा जाता है। महज 9 साल की उम्र में शूटिंग शुरू करने वाली ईशा ने 13 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय चैंपियन बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। अब वह 25 मीटर पिस्टल में विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं और एशियन गेम्स 2026 में भी अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर चुकी हैं। पांच शूट-ऑफ के रोमांच से गुजरते हुए ईशा ने आखिरकार रजत पदक अपने नाम किया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और मजबूत की।
9 साल की उम्र में पहली बार थामी पिस्टल
ईशा का जन्म एक जनवरी 2005 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिता सचिन सिंह मोटरस्पोर्ट्स से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर के रैली ड्राइवर रहे हैं। शूटिंग शुरू करने से पहले ईशा ने गो-कार्टिंग, टेनिस, बैडमिंटन और स्केटिंग जैसे खेल भी आजमाए थे। 2014 में नौ साल की उम्र में पिता के साथ हैदराबाद के गाचीबोवली शूटिंग रेंज पहुंचीं और यहीं से उनका निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ। शुरुआत में बंदूक का वजन उनके लिए बड़ी चुनौती था। बाद में उन्हें हल्की पिस्टल मिली और ईशा को यह खेल पसंद आ गया। उनके लिए पिस्टल से निकलने वाली गोली की आवाज भी खास थी। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को गंभीरता से अपनाया।
शूटिंग रेंज दूर थी, पिता ने घर में ही बनाया इंतजाम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईशा के घर से गाचीबोवली की शूटिंग रेंज करीब एक घंटे की दूरी पर थी। रोजाना इतनी दूर आना-जाना उनके प्रशिक्षण में बड़ी चुनौती था। ऐसे में उनके पिता ने घर पर ही पेपर टारगेट वाला अभ्यास सेटअप तैयार किया, जिससे ईशा नियमित रूप से अभ्यास कर सकें। बाद में उन्होंने गगन नारंग की गन फॉर ग्लोरी अकादमी में भी प्रशिक्षण लिया। कम उम्र में ही पढ़ाई, ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के बीच संतुलन बनाना उनके सफर का हिस्सा रहा। शूटिंग के प्रति उनका फोकस लगातार बढ़ता गया और जल्द ही नतीजे भी सामने आने लगे।
13 की उम्र में ईशा ने जीता राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब
2015 में ईशा ने 10 मीटर एयर पिस्टल में तेलंगाना की राज्य चैंपियनशिप जीती। इसके तीन साल बाद 2018 में उन्होंने महज 13 साल की उम्र में सीनियर राष्ट्रीय चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। तिरुवनंतपुरम में हुई 62वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में ईशा ने महिला 10 मीटर एयर पिस्टल में 241.0 का स्कोर कर स्वर्ण जीता। उन्होंने मनु भाकर और अनुभवी शूटर हीना सिद्धू जैसी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा। उसी प्रतियोगिता में उन्होंने यूथ और जूनियर वर्ग में भी स्वर्ण जीते।
जूनियर में चमकीं, सीनियर स्तर पर भी बनाई पहचान
राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद ईशा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी तेजी से अपनी जगह बनाई। 2019 में उन्होंने एशियन एयरगन चैंपियनशिप में पदक जीता। इसके बाद जूनियर विश्व कप और एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी उनके खाते में पदक आए। हांगझोउ एशियन गेम्स, जो 2023 में हुए, वहां ईशा ने चार पदक जीते। इनमें 25 मीटर पिस्टल का व्यक्तिगत रजत और टीम स्वर्ण भी शामिल था। इसके बाद उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
विश्व रिकॉर्ड के साथ ईशा ने म्यूनिख में रचा नया इतिहास
ईशा ने 27 मई 2026 को म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप के दौरान 25 मीटर पिस्टल के फाइनल में 43 हिट का स्कोर किया। इसके साथ उन्होंने सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों का विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईएसएसएफ के आधिकारिक रिकॉर्ड में 43 का स्कोर विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है। यही प्रदर्शन उनके मौजूदा कद की बड़ी तस्वीर दिखाता है। 2026 में वह 25 मीटर पिस्टल की विश्व रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच चुकी हैं।
पांच टाई-ब्रेकर के बाद ईशा सिंह के नाम हुआ रजत पदक
28 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स के 25 मीटर पिस्टल फाइनल में ईशा ने बेहद उतार-चढ़ाव भरा मुकाबला खेला। वह एक समय चौथे स्थान पर खिसक गई थीं, लेकिन वापसी करते हुए पदक की दौड़ में बनी रहीं। 50 शॉट के बाद ईशा और चीन की जियारुइक्सुआन जियाओ दोनों के 38 अंक थे। इससे पहले नॉर्थ कोरिया की किम ह्योन सुक के खिलाफ रजत और कांस्य का फैसला करने के लिए ईशा को तीन शूट-ऑफ खेलने पड़े। पहले दो शूट-ऑफ 3-3 से बराबर रहे, जबकि तीसरे में ईशा ने 3-2 से जीत दर्ज कर रजत पक्का किया। इसके बाद स्वर्ण के लिए जियाओ के खिलाफ दो और शूट-ऑफ हुए। पहला 4-4 से बराबर रहा, लेकिन अगले शूट-ऑफ में जियाओ ने 3-2 से बाजी मार ली। इस तरह ईशा ने पांच शूट-ऑफ के बाद एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रजत पदक अपने नाम किया।
माता-पिता के भरोसे ने ईशा को दिलाई नई पहचान
ईशा की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का योगदान भी अहम रहा है। घर पर अभ्यास की व्यवस्था से लेकर लगातार प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण के बीच उनका साथ देने तक परिवार ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईशा ने कम उम्र में ही खेल को अपना लक्ष्य बनाया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय चैंपियन से लेकर विश्व रिकॉर्डधारी और अब एशियन गेम्स की रजत पदक विजेता तक का सफर तय किया है। नौ साल की वह बच्ची, जिसने गाचीबोवली में पहली बार पिस्टल पकड़ी थी, आज 25 मीटर पिस्टल की विश्व रिकॉर्डधारी है। उसके सफर में सबसे खास बात यही है कि उम्र बढ़ने के साथ लक्ष्य भी लगातार बड़ा होता गया।


