नई दिल्ली : भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ रविवार (11 जनवरी) को 53 वर्ष के हो गए। उनका जन्म 11 जनवरी 1973 को हुआ था। एक साधारण परिवार से निकलकर राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट की दुनिया में असाधारण मुकाम हासिल किया। बतौर बल्लेबाज उन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज कीं और बाद में कोच के रूप में भी अपनी सफलता की छाप छोड़ी। टीम इंडिया के कोच पद से हटने के बाद इन दिनों द्रविड़ अपने घर-परिवार के साथ समय बिताते हुए निजी जीवन का आनंद ले रहे हैं।
एक सफल क्रिकेट करियर के बाद राहुल द्रविड़ की कोचिंग में भारतीय टीम ने 2024 में टी20 विश्व कप का खिताब जीता था। इसके कुछ समय बाद उन्होंने कोच पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी कोचिंग में टीम इंडिया ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे विश्व कप के फाइनल तक भी अपनी जगह बनाई। द्रविड़ अपने दौर के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक रहे हैं और टेस्ट व वनडे दोनों फॉर्मेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनके कई रिकॉर्ड ऐसे हैं जिन्हें तोड़ना बेहद मुश्किल माना जाता है।
राहुल द्रविड़: भारतीय बल्लेबाजी के मजबूत स्तंभ और उनकी प्रमुख उपलब्धियां
- कुल 24,208 अंतरराष्ट्रीय रन।
- 48 अंतरराष्ट्रीय शतक।
- 5 दोहरे शतक।
- 146 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतकीय पारियां।
- 2024 टी20 विश्व कप के विजेता हेड कोच।
- 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित।
- 2004 में आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर।
- 2018 में आईसीसी हॉल ऑफ फेम मेंशामिल।
द्रविड़ का शुरुआती जीवन
राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ था। इनका पूरा नाम राहुल शरद द्रविड़ है। जन्म के कुछ समय बाद उनका परिवार कर्नाटक चला गया। द्रविड़ ने मात्र 12 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 टीमों के लिए कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया। बचपन में ही पूर्व क्रिकेटर केकी तारापोर ने उन्हें क्रिकेट की बारीकियों की ट्रेनिंग दी।
द्रविड़ ने फरवरी 1991 में रणजी ट्रॉफी के माध्यम से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की और पहले ही मैच में 82 रन की शानदार पारी खेली। उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका अप्रैल 1996 में श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय मैच में मिला, जबकि टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने जून 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ पदार्पण किया। टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ के कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें तोड़ना बेहद मुश्किल माना जाता है।
1. द्रविड़ का रिकॉर्ड: सबसे ज्यादा गेंदों का सामना करने वाले बल्लेबाज
अपने पूरे करियर में राहुल द्रविड़ गेंदबाजों के लिए किसी बुरे सपने की तरह रहे। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कुल 31,258 गेंदों का सामना किया, जो एक अद्भुत विश्व रिकॉर्ड है। इसे समझने के लिए बस यह जानना पर्याप्त है कि 31 हजार से अधिक गेंदों का सामना करना मतलब 5,210 ओवर से ज्यादा बल्लेबाजी करना! आधुनिक क्रिकेट में टेस्ट मैचों में बल्लेबाजी समय कम होने और खेल के बदलते एप्रोच को देखते हुए इस रिकॉर्ड को तोड़ पाना बहुत मुश्किल लगता है।
2. क्रीज पर सबसे ज्यादा समय बिताने वाले खिलाड़ी
राहुल द्रविड़ को बल्लेबाजी एक “ध्यान” की तरह पसंद थी। वह विकेट संभालकर टीम को मजबूत करना जानते थे। यही कारण है कि टेस्ट इतिहास में क्रीज पर सबसे ज्यादा मिनट बिताने का विश्व रिकॉर्ड भी उनके नाम है- कुल 44,152 मिनट! यह आंकड़ा सर्वकालिक महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से भी ज्यादा है। लंबे मैच, मुश्किल परिस्थितियां, तेज गेंदबाज, द्रविड़ सबके सामने खड़े रहे और ‘द वॉल’ की छवि कमाई।
3. टेस्ट में सचिन के साथ सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी
द्रविड़ केवल खुद रन नहीं बनाते थे, बल्कि अपने साथी बल्लेबाजों को भी बेहतर खेलते थे। साझेदारी बनाना उनकी सबसे बड़ी कला थी। उनके नाम टेस्ट इतिहास में 100 या उससे अधिक रनों की सबसे ज्यादा साझेदारियां- 71। इस सूची में दूसरे नंबर पर सचिन तेंदुलकर हैं, जिन्होंने 66 ऐसी साझेदारियां कीं। यह दिखाता है कि द्रविड़ टीम गेम में कितना महत्वपूर्ण रोल निभाते थे। टेस्ट में द्रविड़ और सचिन के नाम सबसे ज्यादा बार 100+ रन की साझेदारी करने का रिकॉर्ड है। इन दोनों ने 20 बार शतक या उससे ज्यादा रन की साझेदारी की। इस रिकॉर्ड के आसपास फिलाहल कोई नहीं है।
4. सबसे ज्यादा बार 300+ रन की साझेदारी करने वाले भारतीय बल्लेबाज
राहुल द्रविड़ को लंबी साझेदारी करना बेहद पसंद था। वह केवल 100 या 150 रन पर नहीं रुकते थे। टेस्ट क्रिकेट में वह भारत के लिए सबसे ज्यादा बार 300+ रन की साझेदारी करने वाले बल्लेबाज हैं। साथ ही वह दुनिया के सबसे ज्यादा 100+ रन की साझेदारी करने वाले बल्लेबाज भी हैं। 300+ रन की साझेदारी उन्होंने कुल तीन बार की है। ऐसे स्कोर विपक्षी को मैच से बाहर कर देते हैं, और यही द्रविड़ की बल्लेबाजी की खूबसूरती थी। वहीं, 100+ रन की साझेदारी उन्होंने 71 बार की है। इनमें नौ बार 200+ रन की साझेदारी और तीन बार 300+ रन की साझेदारियां भी शामिल हैं।
राहुल द्रविड़ की 5 प्रेरक बातें जो जीवन को दिशा देती हैं
राहुल द्रविड़ सिर्फ एक महान क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन इंसान और विचारक भी हैं। उनकी कही बातें केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन में भी सीख और प्रेरणा देती हैं। आइए जानते हैं उनकी कुछ प्रेरक बातें…
- द्रविड़ ने एक बार कहा था- ‘कोई भी सपना अकेला पूरा नहीं किया जा सकता।’
- द्रविड़ अपनी छवि को लेकर परवाह नहीं करते थे। उन्होंने हमेशा कहा, ‘मैं जो हूं, वही हूं। मैंने जानबूझकर अपनी छवि नहीं बनाई है।’
- द्रविड़ कई बार विफल भी हुए, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कहा था, ‘मैं कई बार असफल हुआ हूं, लेकिन मैंने कभी प्रयास करना नहीं छोड़ा।’
- द्रविड़ अपने फैंस का खास ख्याल रखते थे और उन्हें मानते भी थे। उन्होंने एक बार कहा था, ‘लोगों के बीच विश्वास सबसे मायने रखता है।’
- द्रविड़ विदेशी खिलाड़ियों में सबसे सम्मानित क्रिकेटरों में से एक थे। उनका बयान इस बारे में बताता है। द्रविड़ ने एक बार कहा था, ‘आप बदले के लिए नहीं खेलते, सम्मान और गर्व के लिए खेलते हैं।’
राहुल द्रविड़ का शानदार क्रिकेट करियर
राहुल द्रविड़ ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों फॉर्मेट में 10,000 से अधिक रन बनाए। उन्होंने भारत की कप्तानी भी की और जरूरत पड़ने पर विकेटकीपर की भूमिका भी निभाई। द्रविड़ ने एक बार खुलासा किया था कि उन्होंने कभी विकेटकीपिंग या कप्तानी करने की इच्छा नहीं जताई थी, लेकिन टीम ने उनसे दोनों जिम्मेदारियां निभवाईं। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर लगभग हर फॉर्मेट में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। नीचे उनके करियर के प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं—
राहुल द्रविड़ ने बल्लेबाज के रूप में कई यादगार पारियां खेली हैं और कई फैंस के लिए खास पल बनाए हैं। उनकी पारियां अक्सर लंबे समय तक चलती थीं और एक ही पारी कई लोगों के दिन को यादगार बना देती थी। यहां हम उनकी टेस्ट क्रिकेट में खेली गई तीन सबसे बेहतरीन पारियों के बारे में बता रहे है—
1.ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 180 रन बनाए
साल 2000 में भारत ने ईडन गार्डन्स के मैदान में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसे भारत की सबसे बड़ी टेस्ट जीत भी माना जाता है और द्रविड़ ही इस जीत के नायक थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके बाद द्रविड़ ने लक्ष्मण के साथा मिलकर शानदार साझेदारी की और अपनी टीम को जीत की दहलीज पर ले गए। इन दोनों ने मिलकर 386 रन जोड़े और मैच पलट दिया। लक्ष्मण ने 280 रन बनाए। वहीं द्रविड़ ने 180 रन की पारी खेली। भारत ने यह मैच 171 रन से जीता था और सीरीज में 1-1 की बराबरी की थी। इसके बाद चेन्नई में अगला टेस्ट जीतकर भारत ने सीरीज अपने नाम कर ली थी।
2. ऑस्ट्रेलिया जाकर खेली 233 रन की पारी
साल 2003 में भी राहुल द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 233 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 566 रनों का बड़ा स्कोर बनाया था। इसके जवाब में एक बार फिर द्रविड़ और लक्ष्मण ने बेहतरीन बल्लेबाजी की थी। इन दोनों ने 303 रन जोड़े थे और लक्ष्मण ने 148 रन की पारी खेली थी। अंत में भारत को यह मैच जीतने के लिए 233 रन की जरूरत थी और द्रविड़ ने दूसरी पारी में भी नाबाद 72 रन बनाए थे। वो टीम इंडिया को चार विकेट से जीत दिलाकर ही वापस लौटे थे।
3. पाकिस्तान के खिलाफ बनाए थे 270 रन
पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में द्रविड़ ने 270 रन की शानदार पारी खेली थी और अपनी टीम को जीत दिलाई थी। इस मैच से पहले दोनों टीमें सीरीज में एक-एक की बराबरी पर थीं। भारत ने टॉस जीतकर पाकिस्तान को 224 पर समेटा और इसके जवाब में 600 रन बनाए। द्रविड़ ने 270 रन की पारी खेली। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 245 रन पर सिमट गई और मैच 131 रन के बड़े अंतर से हार गई। यह पाकिस्तान की धरती पर भारत की पहली टेस्ट जीत थी।


